Hawan Puja

Acharya Mrityunjay Mishra

Puja, Grah Jap, Hawan & Shanti

।। श्री गणेशाय नमः ।।
SHANTI (ग्रह-शान्ति विभाग) :-

जातक/जातिका की कुण्डली में जो पापग्रह, अविष्ट, ग्रह, मारकेश ग्रह, रोगप्रद गह आदि प्रभाव देंगें, उन्हें आचार्यजी विद्वान् तथा सुयोग्य पंडितों के साहचर्य द्वारा अनुष्ठान विधि से शान्ति करके ग्रहों के दुस्प्रभावों को निरस्त करते है। हमारे यहा निम्न शान्ति की पूर्ण तथा विश्वसनीय व्यवस्था है:-

► सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, वृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु को वैदिक मन्त्रों द्वारा शान्ति।
► महामृत्युन्जयशान्ति
► मृतसंजीवनी विद्या शान्ति
► शुक्राराधित महामृत्युंजय शान्ति
► बगलामुखि मंत्र प्रयोग - शत्रुनिवारण, आकर्षण
► विरीत प्रत्यगिरा शान्ति - भूतप्रेत बाधा निवारण
► श्री हनुमत् शान्ति प्रयोग - सम्पूर्ण बाधा
► श्री दुर्गा शान्ति प्रयोग - शत्रु/ऋम/भूत-प्रेतादिनजर लगाना।
► श्री संतान गोपाल मंत्र प्रयोग - संतान प्राप्ति
► श्री स्वयकरकला मंत्र प्रयोग - शीघ्र विवाह हेतु
► श्री त्रिपुर सुंदरी मंत्र प्रयोग - शीघ्र विवाह हेतु
► श्री विष्णु सहस्त्र नाम संपुट प्रयोग - रोग शान्ति
► श्री दुर्गायप्रशती प्रयोग - आपदा/संतान/विद्या/धन/रोग/शत्रु
► श्रीहरिवंशपुराण प्रयोग - संतान प्राप्ति हेतु
ये सारे अनुष्ठान विधि के साथ एवं श्रद्धा युक्त होकर यजमान द्वारा करवाये जाते है। इसके अलावा रूदाभिषेक, वास्तु शान्ति भी सम्पन्न कराये जाते है।

यंत्र-कवच चिकित्सा :-

आचार्यजी के द्वारा सभी ग्रहों के कारगर/सिद्ध कवच (वेद विधि से युक्त), यंत्र आदि प्रदान किये जाते है।

रत्न-चिकित्सा :-

कार्यालय के द्वारा प्रमाणित ;ब्मतजपपिमकद्ध रत्नों का संकलन किया जाता है तथा उन्हे शुभ मूहूर्त मे मढ़ाकर शुभ मूहूर्त में समंत्रक जातक को पहनाया जाता है।

रूद्राक्ष-चिकित्सा :-

भगवान शंकर के अश्रु से रूद्राक्ष की उत्पत्ति हुई है अतः प्राणप्रतिष्ठित करके मूहूर्त में ज्योतिषीय समाधान के अनुसार रूद्राक्ष (एकमुखी से चैदहमुखी तक) प्रदान किये जाते है।

वास्तु कवचों का संकलन :-

घर में जिस प्रयाग में वास्तुदोष विद्यमान है, उस प्रभाग में वास्त कवचों का प्राणप्रतिष्ठित करके लगावाया जाता है।

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