Adhyatam Pravachan

Acharya Mrityunjay Mishra

Adhyatam Pravachan

।। श्री गणेशाय नमः ।।
(अध्यात्म/प्रवचन) ''कृष्णं वंदे जगत्गुरूम्''

आचार्यजी ने वैदिक शास्त्रों, पुराणों, उपनिषदों तथा अन्यान्य धर्म ग्रन्थों का सम्यक् अध्ययन किया है। वर्तमान मं अचार्यजी अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रीकृष्णभक्ति का प्रचार-प्रसार भी करते आ रहे है। यह मानव जीवन भगवान की महती कृपा तथा अनंत जन्मों के पुण्यों के संग्रहित होने से प्राप्त हुआ है।

''नृदेहमाधं सुलभं सुदुर्लभं, प्लवं सुकल्पं गुरूकर्णधारम्'' - (भागवत)। ......... 'बड़े भाग मानुष तनु पावा' ........ (रामचरितमानस) अतः हमें अपने इस जीवन को अमूल्य समझे हुए इसके प्रत्येक क्षण का उपयोग करना चाहिए। वर्तमान काल में पाश्चात्य संस्कृति हमारे भारतीय-संस्कृति को निगल रही है। चारों ओर विधर्मियो/अधर्मियों का बोलबाला है। मनुष्य अपने लक्ष्य से भटग गया है। मानव अपना सुख तो चाहता है, पर उसे गलत स्थान पर ढॅंढ़-ढूढकर अपना समय एवं धन बर्वाद कर रहा है।

आचार्यजी ने गुरू-परम्परा के द्वारा कर्तव्य-अकर्तष्य कर्मों, ज्ञान, भक्ति आदि का सम्यक् दर्शन प्राप्त किया हैं हरि-गुरू के आज्ञानुसार श्रीकृष्ण भक्ति का प्रचार उनके जीवन का मूल उद्देश्य है। अतः यदि आप किन्जित मात्र भी भगवान के प्रति भक्ति रखते है तथा सनातन हिन्दु धर्म के प्रति आस्था रखते है, तो आप आचार्यजी द्वारा प्रवचन अवश्य आयोजित करायें।

अध्यात्म सेवायें:-

1. श्रीमद्भागवत् कथा
2. श्री राम कथा
3. नारदभक्ति सूत्र - प्रवचन
4. रासपंचाध्यायी (भागवत) - प्रवचन
5. गीता शास्त्र विवेचना
6. वेद, उपनिषद - विवेचना

वेद-उपनिषद के प्रवचन में कम से कम बारह दिवस लगते है। श्रीराम कथा 9 दिनों की तथा श्रीमदभागवत् कथा 7 दिनों की होती है। इसके अलावे हरिवंश पुराण, विष्णुपराण, शिवपुराण, षद्मपराण की कथायें श्री आयोजित की जाती है। चॅंकि श्रीमद्भागवत् सभी वेदों/पुराणों का सार है:- 'सर्ववैदतिहासानां सारं सारं समुधृतम्'' । अतः के बाद श्रीमद्भागवत् के भष्य आयोजन से ही सभ शास्त्रों के सुनने का फल प्राप्त हो जाता है। अतः मुख्यतः श्रीमदभागवत् का ही आयोजन करना/करवाना चाहिएा।


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